Railway Interesting Facts: भारतीय रेलवे ने बदलते दौर में ट्रेनों का ऐसा आधुनिकीकरण किया है जिसे देखकर दुनिया भर के देश हैरत व्यक्त करते हैं। रेलवे द्वारा सुपरफास्ट गति से किए बदलावों के दम पर ही आज भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में शुमार हो चुका है। बीत कुछ सालों में रेलवे ने देश को वंदे भारत, वंदे भारत स्लीपर, तेजस जैसी कई अत्याधुनिक ट्रेनों की सौगात दी है। मगर क्या आप रेलवे की उस खास ट्रेन के बारे में जानते हैं जिसमें खिड़की और दरवाजा ही नहीं है ? आज हम आपको बताएंगे कि, भारत की वो इकलौती ट्रेन कौन सी है जिसमें खिड़की-दरवाजे ही नहीं हैं और ये किस काम आती है।
गौरतलब है कि, रेलवे द्वारा NMG (New Modified Goods) ट्रेनों का संचालन किया जाता है। ये ट्रेनें एक खास किस्म की मालगाड़ी होती हैं जो कि एक स्टेट से दूसरे स्टेट तक बेशकीमती सामान के साथ सफर करती हैं या यूं कहें कि बेशकीमती सामान की ढुलाई करती हैं। NMG (New Modified Goods) ट्रेन देखने बिल्कुल पैसेंजर गाड़ी की तरह लगती हैं मगर इसमें खिड़की दरवाजों की जगह पूरी तरह पैक होती है। इस ट्रेन की स्पीड 75 किमी प्रति घंटे होने का दावा किया जाता है।
दरअसल, रेलवे पैसेंजर ट्रेनों में लगे ICF कोच कोडल का जीवन 20 से 25 साल तक का होता है। हालांकि, बहुत सी पैसेंजर ट्रेनों के कोच ऐसे भी होत हैं जो कि 20 साल में ही दम तोड़ देते हैं। ऐसे में इस कोच को कार्यमुक्त कर दिया जाता है। इसके बाद इन कोच को Periodic Overhauling के लिए प्रेषित कर दिया जाता है जहां इनको ऑटो कैरियर में बदला जाता है और NMG (New Modified Goods) ट्रेन का नाम दिया जाता है। इन ट्रेनों का डिजाइन इस बात को ध्यान में रखकर किया जाता है कि इनमें कार, मिनी ट्रक और ट्रैक्टरों की लोडिंग आसानी से की जा सके।

बता दें कि, NMG ट्रेनों की सबसे बड़ी खासियत उसके खिड़की दरवाजे हैं जो कि बंद कर दिए जाते हैं। Periodic Overhauling के लिए गए पैसेंजर कोच के मोडिफिकेशन के बाद इनको बनाया जाता है। चूंकि, इन ट्रेनों में कार और ट्रैक्टर की ढुलाई होती है और एक स्टेट से दूसरे स्टेट तक जाने में इनको अच्छा-खासा समय लगता है। इस अंतराल में अंदर रखे बेशकीमती सामान से कोई छेड़छाड़ न कर सके इसके लिए इसके खिड़की-दरवाजों को पूरी तरह से पैक कर दिया जाता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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